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लेखनी कहानी -30-Dec-2022

(मन कै पीरु)

           (मत्तगयन्द या मालती सवैया)

बाइसु मा बसि गें परदेसु न टोहु लिहें जहु के दुलरावै ।
जेबरु पाँचु बनै इहि बेरि इ कौलु रही कहु के सुधियावै ।
भूलिनु ना हमहूँ बतियाँ भलु जालिमु जायि इ के बतरावै ।
प्रेमहिं बंधनु बाँधि गयो तउ दूरि सनेहु ज भाउ न भावै ।।

थोथरु धारु भयो जहु नेहु त कौनु भला पुनि लौटि हँ आवै ।
सूखि गई रसु कै नदिया जउ कौनु भला पुनि घाटु छिंकावै ।
मौनु त साधि रहौं कबु लौं कहु कौनु भला पुनि यादु दिलावै ।
गाय बँधी इकु ही जउ खूँटि त कौनु भला पुनि छुट्टनि भावै ।।

रातु कटै न कटै दिनवाँ इकु बातु इहै मन ही मन खावै ।
का तुमहूँ भलुआनु अहौ बिदुरानु अहौ जहु मों नहिं भावै ।
कोकिलि कूकतु हौ कतहूँ भलु मोहतु रागु बसंतु हँ गावै ।। 
गैलु रहौ चहि गोलु रहौ बखरी तुमहीं कँ परै जहु तावै ।।

आँगनु सूनु अहै तुम्हरे बिनु का जहु सालु उमंगु न छावै ?
देहुँ गरानि अहै दुखु- दारुनु  का जहु सालु तरंगु न लावै ?
संगु बसौ हमरे हिय माहिं त का जहु सालु ज रंगु न भावै ?
लालहिं लालु दिखातु चहूँ तउ का जहु सालु अनंगु न घावै ??

जीवनु मा तबहीं रसु हौ जबहीं सँगु मा मिलि रासु रचावै ।
आधि-बियाधि भुलायि सबै बनि माधउ-राधउ धूमि मचावै ।
फूलनु सी भलु फूलि फलै मुसुकायि हिया महिं प्रेमु जगावै ।
धन्य-सुधन्य बनै जिनिगी पियवा मिलि जाहु त काहु न भावै ।।

-अभिलाषा देशपांडे

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3 Comments

Varsha_Upadhyay

30-Dec-2022 04:50 PM

शानदार

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Sachin dev

30-Dec-2022 04:39 PM

Nice 👌

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बहुत ही सुन्दर

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